कफ दोष या कफ विकार उन तीन दोषों या ऊर्जाओं में से एक है जो आयुर्वेद, प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति के अनुसार हमारे शरीर में मौजूद हैं।
Info shared by Karnal Plus
पेट की चर्बी एक सामान्य समस्या है जो लोगों के बीच आमतौर पर देखी जाती है। यह अस्वस्थ जीवनशैली, अनियमित खान-पान, बैठे रहने की आदत।
यदि हम अपनी खानपान का ध्यान नहीं रखते हैं, तो पित्त दोष हो सकता है। इससे हमारे शरीर में अनेक समस्याएं हो सकती हैं।
पीसीओडी एक ऐसी बीमारी है जिसका मुख्य कारण महिलाओं के शरीर में हार्मोनल असंतुलन है। हार्मोनल असंतुलन के साथ बढ़ा हुआ वजन भी इस बीमारी का रिस्क बढ़ा देता है।
सोरायसिस एक ऐसा चर्म रोग जिससे आज बहुत से लोग परेशान हैं। ऐसा रोग जिसमे स्किन पर काले और लाल से छाले बन जाते हैं।
वात दोष या वायु दोष वह दोष है जो गति के लिए जिम्मेदार होता है और वायु और ईथर तत्वों से जुड़ा होता है। इसलिए वात दोष को वायु दोष नाम से भी जाना जाता है।
वात पित्त कफ आयुर्वेद की पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणाली की तीन मूलभूत अवधारणाएँ हैं।
ग्रीन टी एक प्रकार की चाय है जो कैमेलिया साइनेंसिस पौधे की पत्तियों से बनाई जाती है, जो आमतौर पर चीन में पाई जाती है।
आयुर्वेद इस विश्वास पर आधारित है कि मानव शरीर सहित ब्रह्मांड में सब कुछ जुड़ा हुआ है। आयुर्वेदिक चिकित्सा दोषों के बीच संतुलन और सामंजस्य बनाए रखने के महत्व पर जोर देती...
एलो वेरा एक रसीला पौधा है जिसका उपयोग सदियों से इसके कई स्वास्थ्य और सौंदर्य लाभों के लिए किया जाता रहा है।
